Saturday, April 23, 2011

ग़ज़ल

    चाँद तनहा है, आसमा तनहा 
    चाँद तनहा है , आसमा तनहा .....
     बात निकली है जो दिल की तो दिल भी तनहा है |
     चाँद तनहा है .................
     इश्क की राह पर चल रहे है जो कदम ,
चल रहे है साथ मगर फीर भी तनहा .......         
 चाँद तनहा है ............
 आज भी हुश्न को देखकर शायरी कहते है क्या ?
  अब तो ग़ालिब की हवेली में ग़ालिब तनहा ............
 चाँद तनहा है ...........
  ओश की बूंद पर गर्म रेतो के निशा.......
तप रही है जम़ी प्यार की , और     ख्वाईशे  तनहा ...... 
चाँद तनहा है ...................              

2 comments:

  1. Itna khalipan accha nahi hai "v".
    vaise ghazal acchi hai --Tap rahi hai jameen pyar ki .......Apurva

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  2. ye khalipan nhi hai ye aajkal ke risto ke bare me h ai ki sath hoker v log sath nhi hote?

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thanks