Sunday, July 15, 2012


             गजल

 मुझको देख  कर उसने नायाब  कर  दिया .....
चन्द  शब्द से  मुझे किताब कर दिया ..
मेरी चाहतों के हवाले से .... 
जो छायें लाल बादल  उसकी आँखों में .......

 आँखों से आँखों को शराब कर दिया ...

मुझको देख कर उसने नायाब  कर दिया ...

चाहता है वो मुझे  ये राह  भी  धुंध में है ...
तो भी उसकी कसक  ने  शामें -ग़ज़ल  को शबाब कर  दिया . 
धीमें धीमें  से  नब्ज़ में घुलती है सांसें उसकी ...
और मेरी चुड़ियों की खनक में बस कर ,,  

 हर   खनक को  बेमिशाल कर दिया ...

 मुझको देख  कर उसने नायाब  कर  दिया .....
चन्द  शब्द से  मुझे किताब कर दिया ..


 यु अधेंरों में जब भी रौशिनी तरासी हमने ...
 कसम तेरे खुमारी की एक नही सौं चराग जल गये ।

 और मेरी वफा ने अब , तेरी बेवफाईयों का हिसाब कर दिया 

मुझको देख  कर उसने नायाब  कर  दिया .....
 चन्द  शब्द से  मुझे किताब कर दिया ..


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3 comments:

  1. चंद शब्दों से मुझे किताब कर दिया......

    सरल भाव से लिखी गयी अलबेली किताब.....

    (कुछ शब्दों को ठीक कर लें....कृपया)

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  2. बेहतरीन रचना देने के लिए आभार

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  3. "मुझको देख कर उसने नायाब कर दिया .....
    चन्द शब्द से मुझे किताब कर दिया .."
    लाजवाब रचना...|

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thanks