Wednesday, August 13, 2014

ग़ज़ल

    चाँद   तनहा  है, आसमा   तनहा 
    चाँद तनहा है , आसमा तनहा .....
     
   बात निकली है जो दिल की तो दिल भी तनहा है |
     चाँद तनहा है .................
  
  इश्क की राह पर 
  चल रहे है जो कदम ,
  चल रहे है साथ मगर फीर भी तनहा .......         
 चाँद तनहा है ............
 आज भी हुश्न को देखकर 
  शायरी कहते है क्या ?
  अब तो ग़ालिब की हवेली में 
  ग़ालिब तनहा ............
 चाँद तनहा है ...........
  ओश की बूंद पर
 गर्म रेतो के निशा.......
तप रही है जम़ी प्यार की , 
 और     ख्वाईशे  तनहा ...... 
              
    चाँद   तनहा  है, आसमा   तनहा 
    चाँद तनहा है ,